Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 86
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, verse 86 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 86
संस्कृत श्लोक
ववुरशनिनिपातपीडिताङ्गा दलितशिलाशकलाः ककुम्मुखेषु ।
प्रलयसमयसूचका भटानां कृतपटुटांकृतटङ्किनः समीराः ॥ ८६ ॥
हिन्दी अर्थ
दसो दिशाओं में प्रबल आँधी बहने लगी । जैसे वजर गिरने से लोगो के शरीर में
दर्द होता है, वैसे ही उक्त आँधी ने प्राणियों के अगो को व्यथित कर डाला, बड़ी-बड़ी शिलाओं
के टुकड़ों को तोड़-फोड़ डाला, योद्धाओं के प्रलय काल की सूचना करनेवाले एवं योद्धाओं के
प्रतियोद्धाओं द्वारा किये गये बड़े-बड़े टंकारों से यानी शिलाओं को तोड़ने की ध्वनियों से
टंकवाले से अर्थात् पत्थरों को तोड़ने के हथियारों से (घनोंसे) युक्त-सी थी