Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verses 26–27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, verses 26–27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 26,27
संस्कृत श्लोक
यावद्विदूरथादन्यं मोहो नयति मन्दताम् ।
तावद्विदूरथो राजा प्रबोधास्त्रमथाददे ॥ २६ ॥
ततः प्रबोधमापन्नाः प्रजाः प्रातरिवाब्जिनी ।
विदूरथे भवत्सिन्धुः कुद्धोऽर्क इव राक्षसे ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्मोहनास्त्र से उत्पन्न मोह के विदूरथ से भिन्न
लोगों को मन्द बनाते न बनाते राजा विदूरथ ने प्रबोधास्त्र उठाया । प्रबोधार्त्र के सन्धानसे
प्रातः काल में कमलिनी की (कमलसर की) नाई सब लोग जाग उठे, तब तो जैसे सूर्य मन्देह
नाम के राक्षस पर क्रुद्ध होता है, वैसे ही राजा सिन्धु विदूरथ पर क्रुद्ध हुआ यानी लाल पीला
हुआ