Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
प्रलयपवनपातिताः शिलौघा इव निपतन्ति शिलीमुखास्तदा स्म ।
प्रमिलितमभवत्तयोस्तदानीं प्रलयविजृम्भितसिन्धुसंभ्रमेण ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय
प्रलयकालीन वायु से गिराये गये पत्थरों के समूहों की नाई बाण उन पर गिरते थे । सिन्धुराज
ओर विदूरथ का परस्पर संमिलन प्रलयकाल में बढ़े हुए दो समुद्रो के परस्पर संमिलन विलास
के तुल्य हुआ