Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एतस्मिन्वर्तमाने तु घोरे समरसंगमे । लीलाद्वयमुवाचेदं ज्ञप्तिं भगवतीं पुनः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामचन्द्रजी, जब कि उक्त भीषण समर-संगम हो रहा था, दोनों लीलाओं ने भगवती सरस्वती देवी से फिर यह पूछा

सर्ग सन्दर्भ

छियालीसवाँ सर्ग समाप्त सैंतालीसवाँ सर्ग सिन्धुदेश के राजा का शत्रुपर विजय पाने में हेतुकथन, सूर्योदय और रण का क्रम वर्णन तथा दोनों राजाओं का विविध मन्त्रास्त्रों द्वारा युद्ध वर्णन ।