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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

खदखदरवसंवहच्छरोघं टकटकितारवसंपतद्भुशुण्डि । झणझणरवसंमिलन्महास्त्रं तिमितिमिवद्रणमास दुस्तरं तत् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

उसमें खट-खट शब्द के साथ बाणवृष्टि बह रही थी, टक टक शब्द के साथ भुशूण्डियाँ गिर रही थी, झण झण शब्द के साथ महान्‌-महान्‌ शस्त्र टकरा रहे थे, उक्त शस्त्रों से अतिरिक्त तिम-तिम शब्द से युक्त वह दुस्तर युद्ध हुआ