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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verses 27–28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, verses 27–28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 27,28

संस्कृत श्लोक

उदगुर्दन्तसंघट्टटंकारा दन्तिनां बलात् । ऊहुः क्षपणपाषाणमहानद्यो नभस्तले ॥ २७ ॥ पेतुः शवा निवातास्तसंशुष्कवनपर्णवत् । निर्ययुर्लोहिता नद्यो रणाद्रेर्मृतिवर्षिणः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

हाथियों के दाँतों के परस्पर टकराने से उत्पन्न हुए टंकार बड़ी तेजी से ऊपर को गये, आकाश में क्षेपणी से निकले हुए पत्थरों की महानदियाँ बहने लगी । आँधी द्वारा फेंके गये सूखे वनपत्तों के समान शव गिरने लगे, मृत्यु की वृष्टि करनेवाले रणरूपी पर्वत से लाल नदियाँ निकलने लगी