Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
प्रशेमुरथ हेतीषु प्रोद्यत्कटकटारवाः ।
एकार्णवपयःपूरैर्वालवा इव वह्नयः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे एकमात्र समुद्र के जलप्रवाहों से
बड़वानल शान्त हो जाता हे वैसे ही राजा विदूरथ के प्रयाण के अनन्तर नगर को लूट-खसोट
रहे राजा सिन्धु के सैनिकों के हथियारों ओर बाणो से उद्भुत हो रहे कटकट शब्द शान्त हो
गये