Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 44, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 44, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
दूरेणाशङ्कमायातैः परैर्नः पुरमाहृतम् ।
रात्रौ वर्षास्विवोद्धोषैः कमलानीव वारिभिः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वर्षाऋतु के बढ़ने के कारण विपुल कलकल नाद करनेवाला
जलप्रवाह जैसे कमलों को छिन्न-भिन्न कर मटियामेट कर डालता है, वैसे ही दूर से नि:शंक
होकर आये हुए शत्रुओं ने रात्रि के समय हमारे नगर को लूटखसोट डाला है