Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
हा कष्टमसिनिर्भिन्ने स्कन्धे सन्नदृढोल्मुके ।
पतितो यन्त्रपाषाणः पुरुष्स्याशनिर्यथा ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
हाय हाय, बड़ा
कष्ट है किसी पुरुषके तलवार से कटे हुए, कड़े उल्मुक(अधजले काठ) से युक्त कन्धे में
वजर की नाई यह यन्त्रपाषाण गिरा