Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
हा दग्धदाराः प्रालेयशीता देहेषु दन्तिनाम् ।
मग्ना मनस्तु महतामिव विज्ञानसूक्तयः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हाय,
पहले तुषार की ठण्ड से ठिठुरी हुई, बाद में आग की झपटों से झुलसी हुई स्त्रियाँ हाथियों
के शरीरों में लीन हो गई, जैसे कि जिन्होंने ज्ञानाग्नि से स्थूल आदि देह जला डाले हैं और
त्रिविधसंताप दूर करने के कारण हिम से भी शीतल हैं ऐसी विज्ञानसूक्तियाँ महान् पुरुषों
के मन में लीन होती हैं