Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
आवां यावो यथायातं वातरूपेण च त्वया ।
आगन्तव्यः स देशस्तु कुमार्या मन्त्रिणापि च ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्, हम लोग जैसे आये थे, वैसे ही जाती हैं, लेकिन
आप, राजकुमारी और मन्त्री मरकर वायुरूप होकर यानी आतिवाहिक देहरूप होकर उक्त
पूर्वजन्म के प्रदेश में आओगे