Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 42, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 42, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
यत्कोशे विद्यते द्रव्यं तद्द्रष्ट्रा लभ्यते यथा ।
तथास्ति सर्वं चिद्व्योम्नि चेत्यते तत्त्वनेन वै ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कोश में जो धन रहता है, उसको उसका द्रष्टा अवश्य जानता है,
वैसे ही चिदाकाश में सब कुछ है, उसका चिदाकाश ही अनुभव करता है