Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verses 7–8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, verses 7–8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 7, 8
संस्कृत श्लोक
परिसंयमितालम्बिमाल्यहाराधराम्बरः ।
पुष्पाहार इवोत्फुल्लं जग्राह कुसुमाञ्जलिम् ॥ ७ ॥
उपधानप्रदेशस्थात्स्वयं पटलकोटरात् ।
बद्धपद्मासनो भूमौ भूत्वोवाचेदमानतः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसने सोते समय इधर-उधर अस्त-व्यस्त हुए माला,
हार ओर धोती को अपने-अपने स्थान पर ठीक किया, सिरहाने के पास रक्खी हुई फूल की
टोकरी से दास की नाई स्वयं ही खूब फूले हुए फूल अंजलि में लिये और भूमि में ही पद्मासन
बाँधकर बड़े विनयभाव से देवियों से यह कहा