Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
वस्तुतस्तु न जातोऽसि न मृतोऽसि कदाचन ।
शुद्धविज्ञानरूपस्त्वं शान्त आत्मनि तिष्ठसि ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
तब परमार्थ वस्तु क्या है ? ऐसी जिज्ञासा होने पर देवी कहती है ।
वास्तव में न तो तुम कभी उत्पन्न हुए हो और न तुम कभी मरे हो, किन्तु विशुद्ध
विज्ञानस्वरूप शान्त तुम अपने सच्चिदानन्द स्वरूप में स्थित हो