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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 61

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

मद्बुद्धार्थो जगच्छब्दो विद्यते परमामृतम् । त्वद्बुद्धारर्थस्तु नास्त्येव त्वमहंशब्दकादपि ॥ ६१ ॥

हिन्दी अर्थ

मुझसे जिसका अर्थ (अधिष्ठान सन्मात्र) ज्ञात है वह जगत्‌ शब्द परम अमृत (नित्य, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, अमृत, अद्वय, ब्रह्म) है ओर आपसे जिसका अर्थ (आरोपितसत्ता) ज्ञात है एेसा जगत्‌-शब्द परम अमृत है ही नहीं । जो (त्वम्‌ ओर "अहम्‌ शब्द की अभिलाषा करते है, वह जगत्‌ प्रमाता भी मुझसे जाना गया परम अमृत है और आपका जाना गया जगत्‌ प्रमाता अमृत है ही नहीं