Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

चिद्व्योम्नो भूतनभसि कचनं यन्मणेरिव । तज्जगद्भाविनानासत्तत्त्वं श्वभ्रमिवाम्बरे ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

चिदाकाश का अभूत असत्य अथवा अनादि मायाकाश में अथवा सूक्ष्म भूतों के कार्यभूत चित्ताकाश में जो जीवरूप से स्फूरण है, वही नाम और रूप से नानास्वरूप को प्राप्त होनेवाला जगत्‌ कहा जाता है । जैसे कि एेन्द्रजालिक की मणिका आकाश में कचन (स्फुरण) बहुत प्रकार के गन्धर्वनगररूप छिद्रों से युक्त सा होता है भाव यह कि उक्त चिदाकाश ही तत्त्व यानी परमार्थ वस्तु हे