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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

चित्ताकाशं चिदाकाशमाकाशं च तृतीयकम् । विद्ध्येतत्त्रयमेकं त्वमविनाभावनावशात् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त ओर अव्यक्त का भी शुद्ध चित्त से पृथक्‌ अस्तित्व नहीं है, ऐसा कहते हैं । हे श्रीरामचन्द्रजी, आप चित्ताकाश, चिदाकाश और तीसरा भूताकाश इन तीनों को एक ही समझिए, क्योकि अधिष्ठानसत्ता के बिना उनका स्फुरण ही नहीं होता । यानी जिसका स्फुरण जिसकी सत्ता के अधीन है, वह उससे अतिरिक्त नहीं होता, ऐसा नियम है, यह भाव है