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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

यथा संवित्तथा चित्तं सा तथावस्थितिं गता । परमेण प्रयत्नेन नीयतेऽन्यदशां पुनः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

अधिष्ठान रुप ज्ञान में स्थूलता, सूक्ष्मता आदि शक्तियों का आविभवि होने पर भी चित्त में स्थूलत्व आदि कैसे प्राप्त होते हैं ? इस पर कहते हैं। जैसी संवित्‌ है, वैसा ही चित्त है, संवित्‌ ही चित्तरूपता को प्राप्त हुई है यदि किसी को यह सन्देह हो कि उसका अन्यथाभाव (संवित्‌ आकारता) कैसे होता है ? तो इस पर कहते हैं। बड़े भारी प्रयत्न से वह फिर अन्य अवस्था को प्राप्त की जाती है