Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verses 46–48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, verses 46–48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 46-48
संस्कृत श्लोक
जनाः पञ्चजना नाम काशब्रह्मचयान्तकाः ।
तथैव भारक्षतथाः पारकाः शान्तिकास्तथा ॥ ४६ ॥
शैव्यारमरकायाच्छा गुहुत्वा नियमास्तथा ।
हैहयाः सुह्मगायाश्च ताजिका हूणकास्तथा ॥ ४७ ॥
पार्श्वेकतकयोः कर्का गिरिपर्णावमास्तथा ।
संत्यक्तधर्ममर्यादास्ते वर्णा म्लेच्छजातयः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, काश तथा ब्राह्मण
के समूहो के अन्तक पंचननामकजल और भारक्षतथ, पारक, शान्ति, शेव्य, आरमरकार,
अच्छ, अगुहुत्व, अनियम, हैहय, सुह्मगाय, ताजिक और हुणक, दक्षिण और उत्तर मेँ कतक
देश के निकट में कर्क, गिरिपर्ण ओर अवम इन्होंने सब वर्ण धर्मो की मर्यादा का सवर्था त्याग
कर दिया हे, इसलिए ये म्लेच्छ कहलाते हैं