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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

वलीपलितनिर्मुक्तं पूर्वभार्याप्सराः सती । अङ्गीकरोति भर्तारं परिज्ञाय रणे हतम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

पहले की पत्नी अप्सरा बन कर रणभूमिमें मारे गये पति को वलीपलित से निर्मुक्त यानी देवभूत जानकर ग्रहण कर रही है, यह देवताओं की उक्ति है