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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 30, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 30, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

स्तब्धा इव स्थिताः केचित्केशोण्ड्रकमिवाम्बरे । वायोः स्पन्दा इवाभान्ति तथा प्रोदितसंविदः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

शंका - पहले आप ब्रह्माण्ड के पतन का असम्भव कह चुके है, उसकी क्या गति होगी ? समाधान - वे ब्रह्माण्डपतन संवित्‌मय हैँ । ऐसे ब्रह्माण्ड मे पतन का कोई विरोध नहीं हैं । कुछ ब्रह्माण्ड आकाश में केशों के गोले की नाई निश्चल से स्थित हैं ओर स्पन्दात्मक वासना से उत्पन्न हुए कुछ ब्रह्माण्ड वायु से स्पन्दन की नाई प्रतीत होते हैं