Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
सच्चेन्न शाम्यति कदाचन दृश्यदुःखं दृश्ये त्वशाम्यति न बोद्धरि केवलत्वम् ।
दृश्ये त्वसंभवति बोद्धरि बोद्धृभावः शाम्येत्स्थितोऽपि हि तदस्य विमोक्षमाहुः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि महान् प्रयास से दृश्यका मिथ्यात्व क्यो सिद्ध करते हो ? उसके सत्य
होने पर क्या क्षति है ? इस पर कहते हैं।
यदि दृश्यरूप दुःख सत् हो तो उसकी कभी शान्ति नहीं होगी, दृश्य की यदि शान्ति नहीं
होगी, तो बौद्धों में केवलत्व की (मोक्ष की) सिद्धि नहीं होगी । दृश्य का अभाव होने पर बौद्धो में
बोद्धुभाव स्थित भी हो, तो भी वह निवृत्त हो जाता है फिर मिथ्याभूत की निवृत्ति के विषय में
तो कहना ही क्या है ? बौद्धों की केवलता को ही विमोक्ष कहते हैं