Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 29, Verses 48–49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 29, verses 48–49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 48,49
संस्कृत श्लोक
श्रीदेव्युवाच ।
एतावतीमिमां व्योम्नः पदवीमागतासि भोः ।
अर्कादीन्यपि तेजांसि यतो दृश्यन्त एव नो ॥ ४८ ॥
यथा महान्धकूपाधः खद्योतो नावलोक्यते ।
पृष्ठगेन तथेहातो नाधः सूर्योऽवलोक्यते ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीदेवी
ने कहा : भद्रे, तुम कितने दूर आकाशमार्ग मे आ गई हो, जहाँ से सूर्य आदि तेज दिखाई ही
नहीं देते हें । जैसे बड़े भारी अन्धे कुएँ के नीचे विद्यमान जूगनूँ बहुत दूर ऊपर बैठे हुए पुरुष को
नहीं दिखाई देता है वैसे यहाँ से बहुत नीचे स्थित सूर्य भी नहीं दिखाई देता