Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
इहैव तस्य संसारे तस्मिन्भूमण्डलान्तरे ।
राजधानीपुरे तस्मिन्पुरन्ध्र्यस्मि व्यवस्थिता ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य भूमण्डलरूप उनका वह संसार भी यही
मन्दिराकाश है, इसमें उनकी राजधानी के नगर में मैं उनकी (राजा पद्यकी) रूप से स्थित
हूँ