Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इदानीं तस्य भर्तुस्त्वं समीपं यदि गच्छसि ।
तत्तेन व्यवहारस्ते पूर्ववत्संप्रवर्तते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इस समय यदि तुम अपने पति के समीप में जाओ, तो उसके साथ तुम्हारा
सम्पूर्ण व्यवहार पहले की नाई (जबकि वह जीवित था उस समय के समान) होगा