Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verses 10–11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, verses 10–11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 10,11
संस्कृत श्लोक
लीलास्मीति विनाभ्यासं तव नास्तगतोऽभवत् ।
यदा भावस्तदा सत्यसंकल्पत्वमभून्न ते ॥ १० ॥
अद्यासि सत्यसंकल्पा संपन्ना तेन मां सुतः ।
सपश्यत्वित्यभिमतं फलितं तव सुन्दरि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सुन्दरी, जब अभ्यास न होने के कारण मैं लीला देह ही हूँ, ऐसा तुम्हारा दृढ़
संस्कार विनष्ट नहीं हुआ था, तब तुम्हारी सत्यसंकल्पता उत्पन्न नहीं हुई थी । आज तुम
सत्यसंकल्प हो गई हो, इसलिए “मुञ्चे मेरा पुत्र देखे” तुम्हारी यह अभिलाषा सफल हुई
है