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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 23, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 23, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

अथ ते ललने लीलालोले ललितलोचने । स्वभावाच्चेत्यसंवित्तेर्नभो दूरमितो गते ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके अनन्तर सुन्दर नयनवाली और वनितोचित विलासों से मनोहर वे दोनों ललनाएँ विषयज्ञान के स्वभाव से (विषयानुसार व्यवहार कल्पना के कारण) यहाँ से अत्यन्त दूर आकाश में गई