Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 75
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 75 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
आदावेव हि नोत्पन्नं दृश्यं संसारनामकम् ।
यदा तदा कथं तेन वास्यन्ते वासनापि का ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि फिर द्वैतवासना का अंकुर हो जायेगा, तो उस पर कहती है ।
संसार नामक यह दृश्य पहले ही जब उत्पन नहीं हुआ तब लोगों को उसकी वासना
कैसे होगी ? और वासना भी क्या है ? भाव यह कि न वासना है ओर न जगत् ही है, फिर
वासना से द्वैत का प्ररोह कैसे ?