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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 74

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 74

संस्कृत श्लोक

अद्यप्रभृति बुद्धासि विमुक्तासि विवेकिनी । वासनातानवं बीजं पतितं तव चेतसि ॥ ७४ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञान से द्वैतवासना का बाध होने पर तत्त्ववासना का शेष रहना ही वासना की अल्पता है, वही मुक्ति का बीज है, वह अब तुम्हारे चित्त मेँ पड गया है, अतएव विवेकशालिनी तुम आज से प्रबुद्ध हो ओर विमुक्त हो