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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 63

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

आदिसर्गे भवेच्चित्त्वं कल्पनाकल्पितं यदा । तदा ततः प्रभृत्येकसत्त्वं दृश्यमवेक्षते ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि चिति तो अद्वृश्य है, यह दश्यसत्वरूपता को कैसे प्राप्त हुई, तो इस पर कहते हैं। हिरण्यगर्भ की सृष्टि में उसे दर्शन का विषय बना रही चिति का चित्त्व धर्म होता है । जब पंचीकरण के द्वारा कल्पना से स्थूलरूप की कल्पना हूई तब सभी से लेकर एक अनुगत तत्त्व दृश्यके अनुरोध से स्वयं भी दृश्यभूत अपने को भ्रान्ति से देखता है