Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
संकल्पनगरं सत्यं यथासंकल्पितं प्रति ।
संदेहं वा विदेहं वा नेतरं प्रति किंचन ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
देह से साध्य अथवा देह से असाध्य जो संकल्प नगर का व्यवहार उसके उपभोग के प्रति
संकल्पनगर सत्य है, यानी व्यवहारक्षम हे । पर देह से साध्य अथवा देह से असाध्य अन्य किसी
व्यवहार के लिए सत्य नहीं हे