Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verses 42–43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verses 42–43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
तवाभ्यासं विना बाले नाकारो ब्रह्मतां गतः ।
स्थितः कलनरूपात्मा तेन तन्नानुपश्यसि ॥ ४२ ॥
यत्र स्वसंकल्पपुरं स्वदेहेन न लभ्यते ।
तत्रान्यसंकल्पपुरं देहोऽन्यो लभते कथम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह देह केवल अन्य सृष्टि के दरवाजे पर जाने में ही प्रतिबन्धक नहीं है । किन्तु तत्त्वज्ञान
का भी प्रतिबन्धक है, ऐसा कहती हैं।
बेटी, अभ्यास न होने के कारण ब्रह्मरूपता को प्राप्त न हुआ तुम्हारा आकार कलनस्वरूप
(कलन यानी अन्तःकरण में जो चिदाभास तत्स्वरूप) स्थित है, अतएव तुम प्रकरणप्राप्त
ब्रह्म को और उक्त पर्वतीय ग्राम को नहीं देखती हो