Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अभूवमहमित्यन्यः प्रजानाथः प्रजापतेः ।
काकतालीयवत्कश्चिद्भवति प्रतिभामयः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व कल्प के ब्रह्मा की वासना से युक्त अविद्या का अविद्या के अधिष्ठानभूत तत्त्व के ज्ञान
से बाध होने पर जो होता है, उसे कहती हैं ।
पूर्वकल्प के प्रजापति से अब मैं प्रजापति हुआ, इस प्रकार काकतालीय के समान
(अकस्मात्) कोई प्रतिभामय (काल्पनिक यानी मनोमय) प्राणी (ब्रह्मा) उत्पन्न होता है