Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
संसारश्चायमाभोगी परमेवेति निश्चयः ।
कारणाभावतो भाति यदिहाभातमेव तत् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञान से ही इस संसार सागर से निस्तार हो सकता है, ऐसा कहती है ।
यह विशाल संसार पर ब्रह्म ही है, यह निश्चय हे । अविद्या के बाध से यदि यह प्रकाशित
होता हे, तो प्रकाशित ही रहता हे यानी फिर उसके आवरण आदि की शंका नहीं रहती है