Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 2, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 2, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
यथा चित्रकृदन्तःस्था निर्देहा भाति पुत्रिका ।
तथैव भासते ब्रह्मा चिदाकाशाच्छरञ्जनम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्पित चित्रप्रतिमा देहरहित होती हुई भी चित्रप्रतिमा के आकार से भासित होती है, वैसे ही
चिदाकाश के प्रतिबिम्ब का ग्राहक स्वच्छ मन प्रजापति के (ब्रह्मा के) रूप से भासता हे