Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 2, Verses 10–11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 2, verses 10–11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 10,11
संस्कृत श्लोक
यम उवाच ।
मृत्यो न किंचिच्छक्तस्त्वमेको मारयितुं बलात् ।
मारणीयस्य कर्माणि तत्कर्तृणीति नेतरत् ॥ १० ॥
तस्मादेतस्य विप्रस्य मारणीयस्य यत्नतः ।
कर्माण्यन्विष्य तेषां त्वं साहाय्येनैनमत्स्यसि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यमराज ने कहा : हे मृत्यो
तुम अकेले अपने बल से किसी को मारने में समर्थ नहीं हो जिसको तुम मारते हो उसके कर्म
ही उसका मारण करते है । तुम्हारी अशक्ति में और कोई कारण नहीं हे, इसलिए उसे यदि तुम
मारना चाहते हो, तो यत्नपूर्वक उसके कर्मो को खोजो । उनकी सहायता से तुम उसे खा
सकोगे ॥