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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 19, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 19, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीदेव्युवाच । वित्तवेषवयःकर्मविद्याविभवचेष्टितैः । वसिष्ठस्यैव सदृशो नतु वासिष्ठचेष्टितः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीदेवीजी ने कहा : भद्रे, वह ब्राह्मण वित्त, वेष, अवस्था, कर्म, विद्या, वैभव ओर आचरणों से वसिष्ठ के सदुश था, पर इक्ष्वाकु कुल का पौरोहित्य ओर श्रीरामचन्द्रजी को उपदेश आदि की वसिष्ठ की चेष्टाओं से रहित था

सर्ग सन्दर्भ

अठारहर्वौँ सर्ग समाप्त उन्‍नीसवाँ सर्ग राजा पद्म के इस सर्ग का जन्म राजा के दर्शन, राज्य की इच्छा और दुढसंकल्प से हुआ, इसका पूर्वजनम के वृत्तान्त से वर्णन ।