Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, Verses 28–29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, verses 28–29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
लीलोवाच ।
यथा पत्युरमूर्तोऽस्मात्सर्गात्सर्गो भ्रमात्मकः ।
जातस्तथा कथय मे जगद्भ्रमनिवृत्तये ॥ २८ ॥
श्रीदेव्युवाच ।
प्राक्स्मृतेर्भ्रान्तिमात्रात्मा सर्गोऽयमुदितो यथा ।
स्वप्नभ्रमात्मको भाति तथेदं कथ्यते शृणु ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
लीला ने कहा :
माता, जैसे इस सृष्टि से मेरे पति की भ्रमात्मक अमूर्त सृष्टि हुई, जगत्-भ्रम की निवृत्तिके
लिए, वैसा मुझसे कहिये