Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 16
7 verse-groups
- Verses 1–23छनक रहे बड़े-बड़े जलकणों की तेजवृष्टि करनेवाले रनों में, अनेक पर्वतो के मणि, माणिक्यमय शि…
- Verse 24ब्राह्मणों ने कहा : देवि, तप, जप, यम-नियमों से सिद्धों की सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त हो स…
- Verses 25–28ब्राह्मणों के मुख से यह बात सुनकर अपने प्रिय के वियोग से भयभीत लीला ने अपनी बुद्धि से ही…
- Verses 29–33मेरे पति का जीव जिसमें घूमता रहे, ऐसे अन्तःपुर के खण्ड में सदा भर्ता द्वारा देखी जाती हुई…
- Verses 34–40ऐसा विचार करके वह सुन्दरी अपने पति से पूछे बिना ही विधिपूर्वक (७७) उग्र तपस्या करने लगी ।…
- Verses 41–42विलीन हो जाती है, वैसे ही अन्तर्धान हो गई
- Verses 43–50इष्टदेवी के सन्तुष्ट होने के उपरान्त वह राजमहिषी जैसे गीत सुनने से हिरनी मारे खुशी के फूल…