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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

शान्ताशेषविशेषं हि चित्प्रकाशच्छटा जगत् । कार्यकारणकादित्वं तस्मादन्यन्न विद्यते ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त रीति से जगत्‌ और जीवकृत भेद का खण्डन करने पर निष्कर्ष कहते हुए उपसंहार करते हैं। चूँकि अति तुच्छ कार्य-कारण आदिभावरूप जगत्‌ चित्‌ से अतिरिक्त नहीं हे, अतः वह पूर्वोक्त रीति से चित्‌-प्रकाश की छटा(एक हिस्से) की तरह ही है, उससे भिन्न सत्ता ओर स्फूर्तिवाला नहीं है, इसलिए वह प्रत्यगात्मरूप ही ठहरा, यह भाव हे