Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 54

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

चितेर्मरीचिबीजस्य निजा यान्तश्चमत्कृतिः । सा चैषा जीवतन्मात्रमात्रं जगदिति स्थिता ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

पहले वर्णित जगत्‌ की चिन्मात्रता का, वचनभंगी से भलीभाँति बोध कराने के लिए, फिर वर्णन आरम्भ करते हैं। प्रकाश की बीजभूत चिति का जो स्वकीय अन्तश्वमत्कार (पदार्थों की प्रथम शक्ति- प्रकाशनशक्ति) है, वह जीव और जीव की उपाधिभूत तन्मात्र बनकर जगत्‌ के वेश से स्थित है