Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
मनो बुद्धिरहंकारो भूतानि गिरयो दिशः ।
इति या यास्तु रचनाश्चितस्तत्त्वाज्जगत्स्थितेः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोड इसे चिद्रूप न देखकर जगद्रूप देखे, तो भी यह जगद्रूप रवना चित् की ही रचना
है, ऐसा कहते है।
मन, बुद्धि, अहंकार, पंच महाभूत, पर्वत, दिशाएँ इत्यादि जो अनेक रचनाएँ हैं, वे चित् ही
हैं, उससे भिन्न नहीं हैं, क्योकि जगत् की स्थिति चिद्रूप ही है