Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
पिण्डग्रहो निवृत्तोऽस्या एवं राम जगत्स्थितेः ।
आकाशमेषा संपन्ना भवतामपि चेतसि ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार के हमारे उपदेश से इस जगत् की स्थिति का
मूर्ताकार निवृत्त हो गया । आप लोगों के भी चित्त में आकाश के समान यह शून्य हो गई