Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
अनवरतप्रवाहपतितोऽयमविद्यानदीनिवहः शास्त्रसज्जनसंपर्कादृते न तरितुं शक्यते ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
अनवरत प्रवाह में पड़ा हुआ यह अविद्यारूपी नदियों का समूह शास्त्र और सज्जन
(संतजन) के संसर्ग के बिना नहीं तरा जा सकता है