Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
त्वय्यात्मनि सिते स्वच्छे सर्वगे सर्वदोदिते ।
कुतो दुःखसुखे राम कुतो मरणजन्मनी ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, स्वयंप्रकाश,
निर्मल, सर्वव्यापक, अविनाशी आत्मरूप आपमें सुख और दुःख का अवसर कहाँ तथा
जन्म-मरण का अवसर कहाँ ?