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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

शरीरातीतवृत्तिस्त्वं शरीरस्थोऽथवा भव । मागाः शोकं च हर्षं त्वं त्वमात्मा विगतामयः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

चाहे आप सदा ही समाधिस्थ रहे, चाहे लोकव्यवहार करते रहें, आप शोक अथवा हर्ष को प्राप्त न हों, क्योंकि आप शोक, मोह आदि दोषों से रहित आत्मा ही हैं