Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
बोधैकत्वादयं सर्गस्तदेवासन्नयत्यलम् ।
सेना मृत्संविदा चित्रा मृन्मात्रमिव मृन्मयी ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
बोध की एकता से ही
यह सृष्टि सद्रूप विश्व को असत् बनाती है अथवा असद् विश्व को सत् के साथ एकरसता को
प्राप्त कराती है । जैसे मिट्टी की बनी हुई सेना मिट्टीबुद्धि से विचित्र होने पर भी विचार दृष्टि से
मिट्टीमात्र की तरह मृन्मयी ही है