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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

विस्मरत्यपि विस्तीर्णां कृतां चेतःक्रियां यथा । तथा कृतामप्यकृतामिति स्मरति निश्चितम् ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस तरह अनुभूत वस्तु की विस्मृति होती है उसी तरह अननुभूत वस्तु का स्मरण भी दोषावह नहीं है, इस आशय से कहते हैं। जैसे विस्तारपूर्वक की हुई क्रिया को चित्त भूल जाता है वैसे ही की हुई क्रिया का भी “मैंने इसे नहीं किया" यों स्मरण करता है। यद्यपि भ्रान्ति में राजा लवण को अनुभव ही हुआ था, स्मृति नहीं हुई थी तथापि अनुभव, स्मृति आदि में जो अवान्तर भेद है, वह भी कल्पनामात्र है; इसलिए वह विचारसह नहीं है, यह सूचित करने के लिए ऐसा कहा है