Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
वृत्तं प्राक्पक्कणे राज्ञः कस्यचिल्लवणस्य यत् ।
प्रतिभातं तदेतस्य सद्वासद्वा मनोगतम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा लवण के व्यवहार में किस रीति से संवाद हुआ; उसे कहते हैं।
उस भीलों की टोली में पहले किसीका जो चण्डाली विवाहादि सम्पन्न हुआ था, वही
राजा लवण के मन में प्रतिभासित हुआ | वह सत् हो या असत् हो । अतएव संवाद का भ्रम
हुआ, यह अर्थ है