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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

वासनावलितं चेतो यद्यथा भावयत्यलम् । तत्तथानुभवत्याशु न तदस्ति न वाप्यसत् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

वासनायुक्त चित्त पूर्णरूपसे जिस वस्तु की जैसी भावना करता है, उस वस्तु का वैसा ही शीघ्र अनुभव करता है, वह वस्तु न सत्‌ हे अथवा न असत्‌ हे